स्कूलों में रखे जाएंगे 60 हजार अनुदेशक, यूपी बोर्ड की तैयारी शुरू UP Board News

On: February 8, 2026 8:30 AM
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UP Board News: यूपी बोर्ड से जुड़े करीब 29 हजार स्कूलों में नए शैक्षिक सत्र 2026-27 से व्यावसायिक पढ़ाई को मजबूती देने की तैयारी शुरू हो गई है इसी के तहत लगभग 60 हजार अनुदेशक रखने की योजना बनाई गई है। बोर्ड ने कक्षा 9 और 11 में व्यावसायिक शिक्षा को अनिवार्य कर दिया है जिससे हर स्कूल को कम से कम दो कोर्स शुरू करने होंगे। यह फैसला अचानक नहीं आया बल्कि पिछले कुछ समय से स्किल आधारित पढ़ाई पर जोर बढ़ाया जा रहा था। स्कूलों में पारंपरिक पढ़ाई के साथ अब प्रैक्टिकल सीख को भी बराबर महत्व दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि इस कदम से छात्रों को पढ़ाई के साथ काम की समझ भी मिलेगी और आगे चलकर रोजगार के मौके बढ़ेंगे। आईए जानते हैं पूरी जानकारी।

हर स्कूल को रखे जाएंगे दो अनुदेशक

यूपीबोर्ड के निर्देश के अनुसार हर स्कूल को अपने संसाधनों से दो अनुदेशक रखने होंगे, ताकि दोनों कक्षाओं में चलने वाले कोर्स नियमित तरीके से पढ़ाए जा सकें। कई स्कूलों ने इसके लिए शुरुआती तैयारी भी शुरू कर दी है। विशेषज्ञ टीम इन अनुदेशकों की योग्यता तय करेगी, और इसी आधार पर स्कूलों को आगे की जानकारी भेजी जाएगी। योग्यता तय होने के बाद स्कूल अपने स्तर पर अनुदेशक रखेंगे जिससे पढ़ाई में किसी तरह की रुकावट न आए।

रोजगार और स्किल पर रहेगा फोकस

बता दें पंडित सुंदरलाल शर्मा केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान भोपाल के सहयोग से तैयार किए गए इन कोर्स में आधुनिक तकनीकी जरूरतें शामिल की गई हैं, साथ ही उद्योग जगत की मांग को भी ध्यान में रखा गया है, ताकि पढ़ाई सीधे रोजगार से जुड़ सके। यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने कहा कि यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप है, और इसका मकसद छात्रों को प्रैक्टिकल ज्ञान देना, उन्हें आत्मनिर्भर बनाना, और भविष्य के लिए तैयार करना है। बोर्ड का मानना है कि सिर्फ किताबों तक सीमित पढ़ाई अब पर्याप्त नहीं है।

108 नए कोर्स एक साथ शुरू होंगे

इसके अतिरिक्त यूपी बोर्ड कक्षा 9 और 11 के छात्रों के लिए एक साथ 108 नए व्यावसायिक कोर्स शुरू करने जा रहा है। इन कोर्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एयरोस्पेस, मीडिया, ऑटो सर्विस टेक्नीशियन जैसे नए दौर के विषय शामिल किए गए हैं। इन विषयों को शामिल करने का उद्देश्य छात्रों को नई तकनीक और बदलते समय की जरूरतों से जोड़ना है। इससे छात्रों को पढ़ाई के दौरान ही अलग-अलग क्षेत्रों की बेसिक समझ मिलने लगेगी।

स्थानीय उद्योग से जुड़ेगी पढ़ाई

स्कूलों को अपनी भौगोलिक स्थिति के आधार पर कम से कम दो विषय चुनने होंगे। मकसद यह है कि छात्र अपने क्षेत्र के उद्योग से जुड़ें और पढ़ाई का सीधा फायदा रोजगार में दिखे। उदाहरण के तौर पर भदोही के स्कूलों में कालीन उद्योग से जुड़े कोर्स शामिल किए जा सकते हैं। इसी तरह अलग-अलग जिलों में वहां के प्रमुख उद्योगों से जुड़े विषय पढ़ाए जाएंगे जिससे छात्रों को स्थानीय स्तर पर ही अवसर मिल सकें।

10 दिन की इंटर्नशिप भी जरूरी

छात्रों को संबंधित उद्योग में 10 दिन की इंटर्नशिप करनी होगी, इस दौरान उन्हें प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि वे किताबों से बाहर निकलकर काम को असल माहौल में समझ सकें। इंटर्नशिप के समय उद्योग और स्कूल के बीच बेहतर समन्वय रखा जाएगा जिससे प्रशिक्षण सही तरीके से पूरा हो सके और छात्रों को पूरा सीखने का मौका मिले, साथ ही पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड स्कूल स्तर पर सुरक्षित रखा जाएगा ताकि आगे जरूरत पड़ने पर इसका उपयोग किया जा सके।

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