यूपीएससी परीक्षाओं को लेकर बड़ा बदलाव, नई गाइडलाइंस जारी UPPSC Exam Rules Change

On: February 6, 2026 9:43 AM
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UPPSC Exam Rules Change: यूपीएससी ने सिविल सेवा परीक्षा 2026 को लेकर इस बार आयोग ने बड़ा बदलाव लागू किया है, जिसका असर खासतौर पर उन उम्मीदवारों पर पड़ेगा जो नौकरी में रहते हुए बार-बार परीक्षा देकर अपनी रैंक सुधारने की कोशिश करते हैं। आयोग की ओर से जारी नए नोटिस में साफ कर दिया गया है कि अब सेवा में रहते दोबारा परीक्षा देने की छूट सीमित कर दी गई है।

पिछले कुछ समय से इस मुद्दे पर चर्चा चल रही थी और अब इसे नियम का हिस्सा बना दिया गया है। नए प्रावधानों में नियुक्ति, प्रशिक्षण, प्रयासों की सीमा और दोबारा चयन से जुड़े कई बदलाव शामिल हैं, जिनके बारे में उम्मीदवारों के लिए सही जानकारी होना जरूरी माना जा रहा है।

सेवा में रहते परीक्षा देने पर रोक

आयोग केनए नियम के मुताबिक यदि कोई उम्मीदवार पिछली सिविल सेवा परीक्षा के आधार पर भारतीय प्रशासनिक सेवा या भारतीय विदेश सेवा में चयनित होकर उसी सेवा में काम कर रहा है, तो वह सिविल सेवा परीक्षा 2026 के लिए आवेदन नहीं कर सकेगा। इसी तरह यदि कोई उम्मीदवार प्रारंभिक परीक्षा 2026 के बाद इन सेवाओं में चयनित हो जाता है और नौकरी जारी रखता है, तो वह मुख्य परीक्षा में शामिल नहीं हो पाएगा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि सेवा में रहते दोबारा चयन का फायदा अब नहीं मिलेगा और इस व्यवस्था को 2026 से सख्ती से लागू किया जाएगा।

नियुक्ति और फाइनल रिजल्ट के बीच नियम

आयोग के अनुसार यदि किसी उम्मीदवार की नियुक्ति मुख्य परीक्षा शुरू होने के बाद लेकिन अंतिम परिणाम आने से पहले भारतीय प्रशासनिक सेवा या भारतीय विदेश सेवा में हो जाती है और वह सेवा में बना रहता है, तो उसे सिविल सेवा परीक्षा 2026 के परिणाम के आधार पर किसी भी सेवा या पद के लिए नहीं माना जाएगा। यानी एक साथ दो अवसरों का लाभ लेने की स्थिति अब खत्म कर दी गई है इस नियम का उद्देश्य चयन प्रक्रिया को स्पष्ट और व्यवस्थित रखना बताया गया है।

आईपीएस और अन्य सेवाओं पर क्या असर

ऐसे सभीउम्मीदवार पहले से भारतीय पुलिस सेवा में चयनित या नियुक्त हैं, वे सिविल सेवा परीक्षा 2026 के परिणाम से दोबारा आईपीएस में शामिल नहीं हो सकते। वहीं जिन उम्मीदवारों को सिविल सेवा परीक्षा 2026 के आधार पर आईपीएस या केंद्रीय सेवा समूह ‘ए’ में जगह मिलती है, वे सिविल सेवा परीक्षा 2027 दे सकते हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें प्रशिक्षण से छूट लेनी होगी। यह छूट केवल एक बार दी जाएगी और ऐसे उम्मीदवारों को फाउंडेशन कोर्स पूरा करना होगा।

ट्रेनिंग और सेवा रद्द होने के प्रावधान

यदि कोई उम्मीदवार प्रशिक्षण में शामिल नहीं होता और छूट भी नहीं लेता, तो सिविल सेवा परीक्षा 2026 से मिली सेवा अपने आप रद्द मानी जाएगी यदि उम्मीदवार को सिविल सेवा परीक्षा 2027 के आधार पर नई सेवा मिल जाती है, तो उसे 2026 और 2027 में से किसी एक सेवा को चुनना होगा। चुनी गई सेवा का प्रशिक्षण पूरा किया जाएगा और बाकी सेवाएं खत्म मानी जाएंगी। यदि 2027 से कोई सेवा नहीं मिलती, तो उम्मीदवार 2026 से मिली सेवा जॉइन कर सकता है, लेकिन दोनों में प्रशिक्षण न लेने पर दोनों सेवाएं रद्द हो जाएंगी।

आगे की परीक्षाओं और प्रयासों की सीमा

आयोग ने यह भी साफ किया है कि जब तक उम्मीदवार अपनी मिली सेवा से इस्तीफा नहीं देता, तब तक वह सिविल सेवा परीक्षा 2028 और उसके बाद की परीक्षाओं में शामिल नहीं हो सकेगा, यदि कोई उम्मीदवार प्रशिक्षण से छूट लेकर आगे परीक्षा देना चाहता है और अपने बाकी प्रयासों का उपयोग करना चाहता है, तो उसे मिली सेवा जॉइन नहीं करनी होगी, वरना सेवा अपने आप खत्म हो जाएगी। साथ ही 2025 या उससे पहले चयनित उम्मीदवारों को एक बार 2026 या 2027 परीक्षा देने की अनुमति दी गई है, लेकिन 2028 या आगे परीक्षा देने के लिए पहले सेवा से इस्तीफा देना पड़ेगा।

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